जयपुर:नीरजा मोदी स्कूल की नौ साल की छात्रा अमायरा की मौत के मामले में स्थानीय अदालत शुक्रवार को लंबी सुनवाई के बाद आज अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगी। पीड़ित परिवार और संयुक्त अभिभावक संघ के अनुसार, अदालत के समक्ष आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने को लेकर विस्तृत कानूनी दलीलें पेश की गईं, जिसके बाद न्यायाधीश ने फैसले के लिए यह तारीख तय की थी।

कक्षा अध्यापिका पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का आरोप

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में जोरदार पक्ष रखते हुए मांग की कि चौथी कक्षा की मृत छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में कक्षा अध्यापिका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 107 के तहत संज्ञान लिया जाए। वकील का तर्क था कि स्कूल परिसर में बच्चों को मानसिक या प्रताड़ित करने वाली परिस्थितियों के लिए सीधे तौर पर पढ़ाने वाले शिक्षक की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

प्रधानाचार्या और प्रबंधन पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग

अदालत में केवल अध्यापिका ही नहीं, बल्कि विद्यालय की प्रधानाचार्या और चेयरमैन तथा प्रबंधन के खिलाफ भी किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत मामला चलाने का अनुरोध किया गया। दलील दी गई कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और गरिमापूर्ण माहौल बनाए रखना केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि संस्था के शीर्ष प्रबंधन का भी प्राथमिक वैधानिक दायित्व है।

शिक्षा मंत्रालय और एनसीपीसीआर की गाइडलाइंस का हवाला

सुनवाई के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की स्कूल सेफ्टी एंड सिक्योरिटी गाइडलाइंस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नियमों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि यदि शिक्षण संस्थान बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहते हैं, तो ऐसी संस्थागत लापरवाही को महज एक छोटी सी चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

पिछले साल स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर दी थी जान

बीते साल एक नवंबर को नौ साल की मासूम अमायरा ने स्कूल भवन की चौथी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मृतका के पिता विजय मीणा और संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने इस मामले में सभी जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई है ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।