देलावाड़ी–सलकनपुर–रेहटी मार्ग पर चौड़ीकरण की राह में वन कानून की बाधा, हजारों यात्रियों की सुरक्षा पर
वर्षा से पहले सड़क के दोनों ओर खोपरा गिट्टी से शोल्डर मजबूत करने की उठी मांग
@ एस के चौहान
भोपाल/ सीहोर - भोपाल से डेलावाड़ी, सलकनपुर होते हुए रेहटी तक जाने वाला राज्य राजमार्ग प्रदेश के महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में शामिल है। यह मार्ग प्रतिदिन हजारों वाहनों के आवागमन के साथ-साथ सलकनपुर देवीधाम आने वाले श्रद्धालुओं तथा नर्मदापुरम संभाग की ओर जाने वाले यात्रियों की जीवनरेखा माना जाता है। इसके बावजूद रातापानी अभयारण्य से गुजरने वाला लगभग 14 किलोमीटर का हिस्सा आज भी सिंगल लेन सड़क है, जिससे यात्रियों को प्रतिदिन जोखिम भरा सफर करना पड़ता है।
जर्जर सड़क बनी दुर्घटनाओं का कारण
सड़क के कई हिस्सों में डामर उखड़ चुका है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी हुई सड़क की किनारियां और ऊंचे-नीचे शोल्डर वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। दो बड़े वाहनों के आमने-सामने आने पर एक वाहन को मजबूरन कच्चे किनारे पर उतरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी चौड़ीकरण में समय लग सकता है, लेकिन तत्काल राहत के तौर पर वर्षा से पहले सड़क के दोनों ओर खोपरा गिट्टी से पैचवर्क कर शोल्डर मजबूत किए जाएं, ताकि वाहनों का आवागमन सुरक्षित और सुगम हो सके।
वर्षों से अधूरी चौड़ीकरण की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग की जा रही है। हालांकि रातापानी अभयारण्य क्षेत्र होने के कारण वन एवं पर्यावरण संबंधी आवश्यक अनुमतियां नहीं मिल पाने से यह कार्य वर्षों से लंबित है। परिणामस्वरूप सड़क का यह महत्वपूर्ण हिस्सा आज भी विकास की प्रतीक्षा कर रहा है।
पर्यटन और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग
यह मार्ग केवल स्थानीय आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन माता मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, भोपाल, सीहोर, रेहटी और नर्मदापुरम जिले के बीच आवागमन का प्रमुख संपर्क मार्ग भी है। इसके बावजूद सड़क की वर्तमान स्थिति यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
लोगों का सवाल—आखिर कब मिलेगा समाधान?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, लेकिन आम जनता की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए सड़क का सुरक्षित चौड़ीकरण किया जा सकता है। वर्षों से लंबित इस परियोजना का समाधान अब समय की मांग बन चुका है।
शासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा
स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार, लोक निर्माण विभाग तथा वन विभाग से मांग की है कि रातापानी अभयारण्य क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराई जाए। साथ ही, जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वर्षा से पहले सड़क के दोनों ओर खोपरा गिट्टी से शोल्डर मजबूत करने और आवश्यक पैचवर्क कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो और हजारों यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

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